मंगलयान और चीन कीअंतरिक्ष सेना

शैलेश कुमार, नई दिल्ली

22 सितंबर 2014

MoM - Mars Orbiter Mission / Mangalyaan
भारत का मार्स ऑर्बिटर मिशन
          Photo Curtsy: ISRO
भारत का महत्वकांक्षी मिशन, मार्स ऑर्बिटर, मंगल की कक्षा में कदम रखने से पहले 24 सितम्बर को आखरी और महत्त्वपूर्ण परीक्षा से गुजरने वाला है। इससे ठीक दो दिन पहले इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन के बैंगलोर स्थित टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क में मौजूद वैज्ञानिकों ने इस अंतरिक्षयान के 440 न्यूटन के 300 दिनों से शीतनिन्द्रा में पड़े मेन लिक्विड इंजन को 3.968 सेकंड दाग कर चौथे प्रक्षेपण पथ का संशोधन मनोयूवोर सफलतापूर्वक कर लिया। पूरी दुनिया की निगाहें भारत के मार्स ऑर्बिटर मिशन पर टिकीं हैं क्योंकि भारत मंगलग्रह पर मार्स ऑर्बिटर भेजने वाला यूरोप, अमेरिका और सोवियत यूनियन के बाद दुनिया का चौथा देश होगा। यहाँ तक की चीन भी अभी ये उपलब्धि हासिल नहीं कर सका है। हिंदुस्तान का महत्वकांक्षी मंगल अभियान पूरी तरह असैन्य और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
Chinese PLA in the garb of civilian in Demchok
चीनी घुसपैठ: देमचोक में भारत और चीन के नागरिक आमने सामने
Photo: Shailesh Kumar

स्पेस में सफलता की इस सीढ़ी के आखिरी पायदान पर जब भारत खड़ा है तो उसे एक चिंता भी होनी चाहिए। चिंता अपने पडोसी देश चीन से। क्योंकि चीन के राष्ट्रपति क्सी जिनपिंग जब भारत आये तभी चीन की पियुप्ल्स लिबरेशन आर्मी ने पहले भारत के देमचोक और फिर चुमार सेक्टर में घुसपैठ की। यही नहीं चीनी सेना ने दोनों जगहों पर अपने टेंट लगा लिए। चुमार में तो दोनों देशों के सैनिक भारतीये जमीन पर गुथ्थमगुत्था भी हो गए। चीन की आर्मी अभी भी भरतीय सीमा में कम से कम दो किलोमीटर अन्दर है। दोनों देशों के बीच बॉर्डर पर ये गतिरोध अभी कुछ समय और कायम रह सकता है। लेकिन भारत के लिए समझने वाली सबसे बड़ी बात ये है की ये सब कुछ हुआ चीनी राष्ट्रपति क्सी जिनपिंग के आदेश पर, क्योंकि वो चीन की सेन्ट्रल मिलिट्री कमीशन यानी सीएमसी के चेयरमैन हैं और चीनी सेना उन्ही से आदेश लेती है। भारत के लिए उससे भी ज्यादा चौकाने वाली बात ये है की क्सी जिनपिंग ने हिंदुस्तान आने से महज़ कुछ दिन पहले ही पियुप्ल्स लिबरेशन आर्मी को एक नयीएयरोस्पेस फ़ोर्सस्थापित करने के निर्देश दिए थे। गैर आधिकारिक सूचनाओं के मुताबिक़ चीनी राष्ट्रपति क्सी जिनपिंग ने पीएलए अधिकारिओं से आग्रह किया था की वो जल्द से जल्द अपनी वायु और अंतरिक्ष कार्यक्रमों का समाकलन करें और उनकी रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं में तेजी लायें।

Xi Jinping with PM Modi: Xi asked PLA to build Aerospace Force
चीनी राष्ट्रपति क्सी जिनपिंग अहमदाबाद में
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ 
Photo Curtsy: PIB, India
चीन की ये तथाकथितएयरोस्पेस फ़ोर्सअंतरिक्ष में सैन्य अभियानों के लिए चीनी मिलिट्री की पांचवी शाखा होगी। चीन में पहले से ही ओवेर्ट और कोवेर्ट ऑपरेशन के लिए पीएलए आर्मी, पीएलए नेवी, पीएलए एयरफोर्स और सेकंड आर्टीलरी मौजूद हैं। सेकंड आर्टीलरी के जिम्मे ही चीन का परमाणु जखीरा और खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइल्स हैं। अब चीन कीएयरोस्पेस फ़ोर्सएक नया पांचवा लड़ाकू दस्ता होगा। हालाँकि चीन खुले तौर पर कहता रहा है की वो अंतरिक्ष का इस्तेमाल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ही करना चाहता है। लेकिन चीन की कथनी और करनी में जमीन- आसमान का अंतर है। अन्दर ही अन्दर चीन धरती और अंतरिक्ष पर अपना वर्चस्व कायम करने के लिए अंतरिक्ष में सिर्फ हथियारों का जमावड़ा कर रहा है, बल्कि अंतरिक्ष में सैन्य अभियानों के सफल अंजाम की पूरी तैयारी भी कर चुका है।
China building a fouth force under Central Military Commission
अंतरिक्ष में सैन्य अभियानों के लिए
चीन की 'एयरोस्पेस फ़ोर्स'
Photo Curtsy: Chinese Military Site

अंतरिक्ष के सैन्यकरण के लिए चीन द्वारा चलाये जा रहे गुप्त अभियानों की जानकारी दुनिया को पहली बार तब हुई जब चीन के स्पेस और मिलिट्री प्रोग्राम के विशेषज्ञ डॉ ज्हुंग्ग फेंग्गन ने बीजिंग यूथ डेली को सन 2002 में एक इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू में डॉ फेंग्गन ने इशारा किया था की चीन एकस्पेस कॉम्बैट वेपन प्लेटफार्मतैयार कर रहा है। चीन का येस्पेस बॉम्बर’, स्वर्गीय डॉ फेंग्गन के मुताबिक, दुश्मन के राडार पर नज़र आने वालास्टील्थऔर सटीक निशाने वालीप्रिसिशन स्ट्राइकतकनीक पर आधारित ऐसा हाइपरसोनिक विमान यानि ध्वनि की गति से 8 से 12 गुना तेजी से चलने वाला विमान था, जो स्पेस और प्रथ्वी के उपरी वायुमंडल में आसानी से जा सकता था। दिसम्बर 2007 में चीन के क्सिओन एच -6 बॉम्बर विमान के धड से चिपके हुएशेन्लोंगविमान की तस्वीरें दुनिया के सामने चुकी थीं।शेन्लोंगविमान आकार में अमेरिका द्वारा विकसित किये जा रहे X-37 B लड़ाकू विमान से बहुत छोटा है, लेकिन महज़ एक घंटे के अन्दर अमेरिका पहुँच कर अन्दर तक अमेरिका के किसी भी शहर में मार कर सकता है।

Shenlong with Xian H-6
शेन्लोंग विकास की प्रारंभिक अवस्था में क्सिआन-6 विमान के धड से जुदा हुआ
Photo Curtsy: Chinese Website 
डॉ फेंग्गन के इस खुलासे से चीन का चेहरा पहली बार दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका था। तब से लेकर अब तक चीन ने अंतरिक्ष में लंबी कुलांचे भरते हुए अपनी वायु और समुद्री सामरिक क्षमता पर नाज़ करने वाले अमेरिका को भी पीछे छोड़, एयरोस्पेस प्लेन, हाइपरसोनिक हथियारों, एंटी सॅटॅलाइट क्षमताओं, एंटी एंटी- सॅटॅलाइट सिस्टम्स, सॅटॅलाइट ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम, सब ऑर्बिटल वेपन, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कण्ट्रोल सिस्टम, मानवरहित ड्रोन जैसी जाने कितनी मारक क्षमताएं हासिल कर ली हैं। और अब सन 2022 तक चीन अंतरिक्ष में अपनेएयरोस्पेस बोम्बर्सबेड़े के लिए एक बड़ा स्पेस स्टेशन बना चुका होगा।  

Chinese Anti Satellite System leaving debris in space creating space garbage
चीन का एंटी सॅटॅलाइट वेपन
Photo Curtsy: Wikipedia
इस दौरान चीन ने अंतरिक्ष में युद्ध की तैयारी का एक नमूना सन 2007 में फिर दिखाया। एक बैलिस्टिक मिसाइल से अंतरिक्ष में काइनेटिक किल व्हीकल दाग कर अपनी ही एक पुरानी सॅटॅलाइट को ध्वस्त कर दिया। स्पेस वार की बुनियाद रखने वाली चीन की इस हरकत से दुनिया सकते में थी। लेकिन चीन महज़ इस लिए दबाव में था कि उसके इस कारनामे से अंतरिक्ष में सॅटॅलाइट के हज़ारों टुकड़ों का कचरा फ़ैल गया था और दुनिया में  उसकी बहुत आलोचना हो रही थी। साथ ही साथ चीन को खुद भी अंतरिक्ष में इस कचरे से खतरा पैदा हो गया था।

अब चीन के सामने स्पेस गार्बेज की शक्ल में एक नयी चुनौती थी। पांच साल के अन्दर चीन ने इस चुनौती से भी पार पा ली। पिछले साल ही जुलाई में चीन ने लॉन्ग मार्च 4 C राकेट से चुंग्जिन-3, शियान-7, और शिजियन-15 नाम की तीन सॅटॅलाइट लांच की थीं। ये रैकेट पूर्व- मध्य चीन के ताईयुआन सॅटॅलाइट लांच सेंटर से दागा गया था। इनमे से शियान -7 नाम की सॅटॅलाइट ने अचानक नाटकीय रूप से अपनी कक्षा यानी अंतरिक्ष में अपना ऑर्बिट बदलना शुरू कर दिया। जल्द ही ये 2005 में लांच हुई शिजियन-7 सॅटॅलाइट की कक्षा में गयी और उस पर अपनी रोबोटिक आर्म से हमला कर दिया। चीन का तर्क था की अंतरिक्ष में कचरे को इकठ्ठा करने के लिए रोबोटिक आर्म सॅटॅलाइट में फिट की गयी थी। 
china's space war through anti satellite system to design for evesdropping or physical attack
दर्शाने हेतु: चीन की एंटी सॅटॅलाइट तकनीक में रोबोटिक आर्म का प्रयोग
Photo Curtsy: NASA
लेकिन अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना था की चीन इस एंटी सॅटॅलाइट तकनीक से सॅटॅलाइट पर भौतिक रूप में हमला कर सकता है और गुप्त रूप से इलेक्ट्रॉनिक ईवेस्ड्रोपिंग यानी सूचनाओं को सुन भी सकता है। यही नहीं चीन दुश्मन देशो की सॅटॅलाइट का अपहरण तक कर करने की क़ाबलियत जुटा चुका है। चीन की एंटी सॅटॅलाइट तकनीक अंतरिक्ष में युद्ध की तैयारी का नमूना भर है। आज हर देश अमूमन हर छोटे बड़े काम के लिए सॅटॅलाइट पर निर्भर है चाहें वो मौसम से जुडी जानकारी हो, रिमोट सेंसिंग, हवाई यातायात, मोबाइल फ़ोन कम्युनिकेशन या फिर टेलीविज़न ट्रांसमिशन। चीन अंतरिक्ष में मौजूद इन सॅटॅलाइट पर कभी भी हमला करने की मारक क्षमता रखता है।

Hypersonic Super stealth High Precision Bomber
WU-14
बीते दिनों में चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट कारपोरेशन एक ऐसे स्क्रेम्जेट हाइपरसोनिक यानी अतिपराध्वनिक मिसाइल का निर्माण कर रहा है जो ध्वनि से 12 गुना अधिक यानि 14,700 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति से चलती हो। ये अल्ट्रा हाई स्पीड हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल WU-14, चीन द्वारा ही तैयार की गयी इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल, पर माउंट किया गया है। WU -14 ग्लाइड व्हीकल धरती से 62 किलोमीटर ऊपर स्पेस में अपने टारगेट की ओर बढता है और अचानक दुनिया के किसी भी कोने में लांच के एक घंटे के अन्दर दुश्मन पर परमाणु हमला कर सकता है। ये अमेरिका के सबसे सुरक्षित समझे जाने एयर मिसाइल डिफेन्स सिस्टम को भी धता देकर सटीक हमला करने की क्षमता रखता है।

           
सब ऑर्बिटल वेपन प्लेटफार्म
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चीन एक ऐसा रहस्यमयी देश है जो अंतरिक्ष में जंगी तिलिस्म बना रहा है। चीन की एयरोस्पेस ताकत में शुमार है सब ऑर्बिटल न्यूक्लिएर वेपन प्लेटफार्म यानि चीन के पास ऐसे एटमी हथियार हैं जो प्रथ्वी की कक्षा में कहीं हैं लेकिन वो कहाँ हैं चीन के अलावा किसी और को नहीं मालूम और चीन जब चाहे अन्तरिक्ष में मौजूद इन हथियारों को नींद से जगाकर किसी भी देश पर परमाणु हमला कर सकता है। और उसके परमाणु हथियार दुश्मन देश के संभावित हमले से सुरक्षित भी रहेंगे यानि चीन को कोलैटरल डैमेज की सम्भावना भी के बराबर होगी। मा क्सिन्ग्रुई, चीन के स्पेस एक्सप्लोरेशन में अहम् भूमिका निभाने वाले वैज्ञानिक हैं। इन्होने परमाणु उर्जा संचालित चीन के चंगे मून लैंड रोवर मिशन लांच के दौरान कहा था की मिशनसीक्रेट वेपनका इस्तेमाल करेगा। आज तक किसी को नहीं मालूम की चीन का ये गुप्त हथियार क्या था।
Evidence of Chinese PLA Soldiers's intrusion inside Demchok
चीनी राष्ट्रपति क्सी जिनपिंग के भारत के भारत दौरे से पहले देमचोक में चीन की घुसपैठ
Photo: Shailesh Kumar
       चीन की स्पेस पॉवर बहुत तेजी से बढ़ रही है। लेकिन धरती पर चीन के सामने कई ऐसे पॉवर सेंटर हैं जिनके आगे चीन लाचार नज़र आता है। चीन का सिर्फ इंडिया से, बल्कि अपने कई पडोसी मुल्कों से सीमा विवाद है। इन विवादों को हल करने के लिए चीन की रणनीति हैअग्रेस्सिवे पोसचुरिंगयानी आक्रामक दिखावा। इसी कड़ी में भारत यात्रा से वापस जाने के बाद राष्ट्रपति क्सी जिनपिंग ने पीएलए से कहा है की वो क्षेत्रीय युद्ध के लिए तैयार रहे। 
Proof of PLA intrusion in India Demchok - tents
चीनी नागरिको की आड़ में भारतीये सीमा में पीएलए टेंट
Photo Curtsy: Shailesh Kumar
चीन दुनिया की सबसे तेजी से बढती अर्थव्यवस्था है। ऐसे में युद्ध करना उसके हक में नहीं। क्योंकि आज की परिस्तिथियों में युद्ध एक अकेले देश से नहीं किया जा सकता। और अगर कई पॉवर सेंटर इस युद्ध का हिस्सा होंगे तो पारंपरिक युद्ध में चीन को हर तरफ से नुक्सान हो सकता है। इसीलिये चीन की रणनीति है बिना खून बहाए एक एक इंच आगे बढ़ो और साम्राज्य का विस्तार करो। और युद्ध की नौबत आये तो अंतरिक्ष से वार करो। ऐसे में भारत में नई मोदी सरकार के सामने चीन एक बार फिर चुनौती है क्योंकि भारत अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ और सैन्यकरण के पूरी तरह खिलाफ़ है। मतलब भारत ने यदि अपनी स्पेस पालिसी नहीं बदली तो चीन से इस मोर्चे पर भी मात मिल सकती है।

(Author can be contacted at- email: skumar.news@gmail.com; twitter: @kalyugikalki)

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